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Sahitya Sangeet

 

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Couplets-6



(51)
हमें फिक्र से फुर्सत का फन आता ही नहीं,'रंजन',
यहाँ फिक्र-ए-अकिबत है,वहां फिक्र-ए-रोज़गार होगा !


(52)
नासेह के शीशे को एकदम से छुपा दिया,
जिसमें चेहरे बिगड़-बिगड़ जाते थे !


(53)
नज़रें फेरना शुरू हो गया हुज़ूर का,
कहानी का अंजाम अभी दूर है !


(54)
एक तेज़ सा दश्ना वाजिब है मौत को,
उनके इन्तिज़ार में कई-कई मौत से !


(55)
इक रोग पाल के बैठा है इन्तिज़ार का,
'रंजन' फिर भी साँस लिए जा रहा है !


(56)
खुदा ने इंसान को बक्श दिया है सब कुछ,
'रंजन' तरस रहा इक इंसानियत के खातिर !


(57)
वो भी इंसान हैं,मुसीबतों में फंसे होंगे,
'रंजन' तू रह-रह कर इल्जाम न दिया कर !


(58)
मय-ए-कौसर अब असर करता ही नहीं,
'रंजन' तुझे ग़म में आब मिलाना होगा !


(59)
आज ही ठीक है जीने के खातिर,
वहां क्या करूंगा,किसीने देखा क्या !


(60)
हर तरफ राह में कड़ी धूप है मेरे दोस्त,
बस तेरी याद के साए हैं सहारा बनकर !

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