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Couplets-9



(81)
अब खुदा ने बुलावा भेजा ही समझो देर में ही सही,
कातिल अब जी भर-भर कर मेरी क़सम खाने लगे !


(82)
शायद दुनिया कायम है दर्द के रिश्ते पर,
कोई नहीं हँसता किसी के गुज़र जाने पर !


(83)
मंजर उस हादसे का बड़ा अजीब-ओ-गरीब था ,
'रंजन' आज मैखाना छोड़ गुलशन में चला गया !


(84)
हर इक अदा पे मर मिटना मिजाज़ है आशिकाना ,
'रंजन' का दिल जले तो वो अपना दिल लगता है !


(85)
जुदा होकर उनसे रहना है तो सज़ा है ज़िंदगी,
और हो विसाल-ए-यार तो एक दम है ज़िंदगी I


(86)
ज़िंदगी फिक्र-ए-कारोबार और फिक्र-ए-अकीबत है,
'रंजन' उन्हीं अज्ज़ा का परेशाँ होने का नाम है I


(87)
शोर-गुल और दर्द भरी चीखों में जी रहा है 'रंजन' ,
कहाँ भाग रही है ज़िंदगी,दी है तो साथ में रह ले !


(88)
जब आ ही गया है तो तड़प ले चीख ले सीख ले 'रंजन' ,
हमें अज्दाद ने येही सब वसीयत कर चले गए I


(89)
जब उनको मिलेगी ज़न्नत और हमें भेंट में दोजख ,
'रंजन' इसी बात पर क्या क़यामत बरपा नहीं होगा I


(90)
आशिक के मौत का इक अदना सा फ़साना है ,
लाख़ों ज़बानों पर आ जाता है लाखों फ़साना है I

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