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(11)
मच्छर का बच्चा पहेली बार उड़ा ! जब वापिस आया तो बाप ने पूछा,कैसा लगा ? मच्छर -बहुत अच्छा ,जहा भी गया लोग तालिया बजा रहे थे !

(12)
सांता - मैं बस पे चडू या बस मुझपे दोनों में क्या फर्क हे ? बंटा - कोई फर्क नहीं दोनों बार टिकट तेरी ही कटेगी !

(13)
एक मछर एक टकले के सर पर जा कर बैठा ,उसके बाद -- दूसरा मच्छर - वाह. क्या घर ढूंडा है ! पहला मच्छर - घर कहा रे ,अभी तो सिर्फ प्लाट ख़रीदा है !

(14)
एक ऑफिस में चार सदस्य जो आपस में गहरे मित्र भी थे,रोज लंच साथ में ही लेते थे !
एक दिन खाते समय एक मित्र जो बंगाली था,अपना डब्बा खोला और बोलI,"रोज-रोज मछली-चावल,कल अगर येही डब्बा आया तो मैं इस पांचवी मंजिल से आत्महत्या कर लूंगा !"

दूसरा मित्र जो उत्तरप्रदेश का था बोला,"रोज-रोज दाल-रोटी,कल अगर येही आया तो मैं भी आत्महत्या कर लूँगा"

तीसरा मित्र जो तमिल था बोला,"रोजो-रोज इडली-सांबर,कल अगर येही आया तो मैं भी आत्महत्या कर लूंगा"

चौथा मित्र जो सरदारजी था बोला,"रोज-रोज छोले-भठूरे,कल अगर येही आया तो मैं भी आत्महत्या कर लूंगा"

बाद में सब अपना लंच ख़तम करके अपने-अपने काम पे लग गए !

दुसरे दिन लंच के समय बंगाली बाबु ने अपना डब्बा खोला और देखा मछली-चावल और खिड़की से कूंद गए और मर गए !

उत्तर प्रदेश के सज्जन ने डब्बा खोला और पाया दाल-रोटी और वो भी कूंद कर आत्महत्या कर ली !

तमिल सज्जन ने भी इडली-सांबर पाया और वो भी कुंद गए !

अंत में सरदारजी ने देखा क़ि डब्बे में छोले-भठूरे,तो उन्होंने भी आत्महत्या कर ली !

पुरे ऑफिस के बिल्डिंग में खलबली मच गई ! पुलिस को बुलाया गया ! पुलिस ने उन चारो मित्रों के पत्नियों को बुलाया !

चारों मित्रों क़ि पत्निया रोते हुए पहुँच गई !

बंगाली बाबु क़ि पत्नी ने रोते हुए कहा,"एक बार कह तो दिया होता क़ि दूसरा डिश दो,मैं वही बनाती थी !"

उत्तर प्रदेशीय सज्जन के और तमिल सज्जन के पत्नियों का भी वही कहना था !

अंत में सरदारजी के पत्नी ने जो चुपचाप रो रही थी,बहुत ही आश्चर्य भरे स्वर में कहा,"मेरे समझ में ये बिलकुल नहीं आया,इन्होने आत्महत्या क्यों किया? ये तो अपना डब्बा खुद ही बनाते थे!!!!!!!"

(15)
चार दोस्त एक कंपनी में काम करते थे ! उन्होंने काफी विचार-विमर्श करने के बाद ये निर्णय लिया कि,"अब हमलोग दुसरे की नौकरी बहुत कर ली,अब अपना ही कोई व्यापार करेंगे !"

काफी सोचने के बाद चारों एक बहुत ही बुद्धिमान और वृद्ध व्यक्ति जिन्हें लोग-बाग़ चाचा कहते थे,के पास गए और अपना विचार सुना दिया !

चाचा:- तुम लोगों ने ज़िंदगी भर सिर्फ कलम घिसा है,कौन से व्यापार के बारे में जानते हो कि कर पाओगे ?

चारों:- चाचा आप कोई भी धंधा बताओ हम करेंगे,लेकिन अब नौकरी नहीं करेंगे !
चाचा:- ठीक है,एक धंधा है जिसे तुमलोग कारीगर नौकर रखकर कर सकते हो,वो है गेराज का धंधा !

चारों:- ठीक है चाचा,आप कहते हो तो हम वही धंधा करेंगे!

कुछ दिनों के बाद चारों चाचा के पास पहुंचे-----

चाचा:- धंधा कैसा चल रहा है ?
चारों:- क्या चल रहा,१५ दिन हो गए चालू किये हुए,एक भी गाडी नहीं !

चाचा:- ठीक है मैं कल आकर देखता हूँ !

दुसरे दिन चाचा पह्नुचकर क्या देखते हैं कि उन चारों ने पहली मंजिल पर गेराज खोल रखा है !

चाचा गुस्से में:- अरे बेवकूफों,येहाँ क्या गाडी पैदल चढ़कर आयेगी ? ग्राउंड फ्लोर पर गेराज खोलो ! इतना कहकर चाचा गुस्से में चले गए !

कुछ दिनों के बाद चारों फिर चाचा के पास पहुंचे---

चारों:- चाचा आपने जैसा कहा था हमने ग्राउंड फ्लोर पर गेराज खोला,लेकिन १५ दिन हो गए एक भी गाडी नहीं!

चाचा:- ठीक है कल आकर देखूंगा !

दुसरे दिन---

चाचा:- गेराज तो ठीक है लेकिन किसीको पता कैसे चलेगा कि येहाँ गेराज है,साइनबोर्ड कहाँ है?

चारों गए दिखाने---देखकर चाचा चिल्ला पड़े---

चाचा:- अरे गधों,ये कहाँ साइनबोर्ड लगाया है?तुम गधे लोगों के बोर्ड के ऊपर का बोर्ड पढ़ा है,उसमें क्या लिखा है! ""बाहर के वाहनों का प्रवेश निषेध है """

येहाँ क्या कोई गाडी ख़ाक आयेगी? तुम लोगों से धंधा होने वाला नहीं है! अब मेरे पास मत आना!

इतना कहकर चाचा गुस्से में चले गए !

चारों ने फिर विचार-विमर्श किया,और सोचा ये धंधा वश में नहीं है, कोई दूसरा धंधा करेंगे! ये सोच कर और गेराज बेच-बाच कर फिर चाचा के पास पहुंचे---

चाचा:- तुम लोग फिर आ गए !

चारों:- चाचा हमें माफ़ करे और कोई दूसरा काम बताइए,जो एकदम आसान हो और हम कर सकें!

चाचा दयालू थे---

चाचा:- ठीक है,टैक्सी खरीद लो और वही चलाओ!

कुछ दिन के बाद चारों चाचा के पास फिर पहुंचे--

चाचा:- कैसा चल रहा है टैक्सी; ठीक है ना?
चारों:- कहाँ चाचा,१५ दिन हो गए एक भी भाडा नहीं आया!

चाचा:- ठीक है,कल आकर देखता हूँ!

दुसरे दिन----

चाचा ( चिल्लाते हुए ):- अरे ओ गधों,इतना भी अक्ल नहीं है कि, तुम चारों उल्लू टैक्सी के अन्दर बैठे रहोगे तो सवारी क्या ख़ाक आयेगी??? अब मैं समझ गया कि तुम लोगों के वश में कोई भी धंधा नहीं है.अब भलाई इसीमें है कि टैक्सी बेच दो और कोई नौकरी पे लग जाओ! अब आना भी मत मेरे पास !

चाचा फुंफकारते हुए चले गए--

अब ये चारों ने सोचा टैक्सी को बेच देते है किसी गेराज पे जाकर,लेकिन जैसे ही टैक्सी चालू किया तो मालूम पड़ा कि पेट्रोल ख़तम!

चारों ने सोचा चलो धक्का मार कर ले चलते हैं!

लेकिन गाड़ी एक सूत भी नहीं हिला!

फिर बहुत हिम्मत करके चारों चाचा के पास गए---

चाचा उन्हें देखकर ही चिल्लाने लगे,लेकिन फिर सब सुनकर उनको दया आ गया,और बोले चलो चलकर देखते हैं!

चाचा:- चलो धक्का लगाओ!

उन्हें धक्का लगाते देखकर चाचा बेहोश होकर गिर गए!!!!

दो आगे से और दो पीछे से धक्का लगा रहे थे !!!


(16)
एक दवा के दूकान का मालिक सुबह जब अपने दूकान पर पंहुचा,तो देखता क्या है कि,सामने के फूटपाथ पर बिजली के खम्भे से टेक लगाकर एक आदमी गुस्से से देखते हुए दूकान की तरफ,खड़ा है !

उसने नौकर से पूछा,"वह आदमी इस तरह दूकान की तरफ गुस्से से देखते हुए क्यों खडा है?"
नौकर:- वह ख्नासी का दवा लेने आया था ! अपने यहाँ दवा ख़तम हो गया था ! तो मुझे गाली देने लगा ! तो मैंने उसे जुलाब होने की कड़क दवा दे दी !

मालिक :- अबे,तूने ऐसा क्यों किया !
नौकर :- जब से उसने दवा खाया है,वहां से हिल नहीं रहा है,और खांसने से डर रहा है !!!!

(17)
पत्नी पति से :- अजी सुनते हैं? कल हमारे शादी को २५ साल होना है ! काफी मेहमान आने वाले हैं ! एक बकरा काटते हैं !
पति :- हमारे एक इतने पुराने गलती की सजा बकरे को क्यूँ ?

(18)
पीते-पीते गाडी नहीं चलाना चाहिए ! पता नहीं कहीं धक्का लगे और कीमती शराब गिर जाये !

(19)
प्यार जरूर अंधा होता है , लेकिन शादी एकदम से आँख खोल देती है !

(20)
कल रात को जो झगड़ा हुआ,उसका दोषी मैं ही था !
पत्नी ने पूछा टीवी पर क्या है,मैंने कहा धूल !

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