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Hindi Couplets Page-14

 




131.
आजकल अफवाहों की बीमारी है फैला हुआ ,
"रंजन" अख़बार छुपाया फिरता है बच्चों से !
132.
अफ़सानागो अब बस भी कर , दीवाना हुआ है क्या ,
"रंजन" को क्यों सुना रहा है उसीकी दास्ताँ कबसे !
133.
अफ़्सूं फैलता है तू सहर से शाम तलक दररोज़ ,
दररोज़ तार रातें हैं चूर नशे में "रंजन" के पैमाने से !
134.
ज़िंदगी को किस क़दर संभाला है ता उम्र "रंजन",
जो किसीकी अमानत है , जिसे मौत कहते हैं !
135.
वो आये और चले गए हर अल्फ़ाज़ को समेटकर ,
"रंजन" देख रहा है बैठा आँगन का हर सुना होंठ !
136.
सहर से बैठा है वो खामोश और देख रहा है "रंजन" को ,
सारे सवाल जब गलत हो तो कोई जवाब भी क्या दे !
137.
वो झूठे चांदी के चमक पर क्यों फिसले खुदा जाने ,
"रंजन' अपने दिल में लाल अल्मास लिए फिरता रहा !
138.
छोटा सा एक अश्क़ क्या काम कर गया "रंजन",
पूछा जो सर-ऐ-राह उसने मेरा हाल इक मुद्दत पे !
139.
सभी करते है सज़दा मस्जिद और मंदिर में में "रंजन",
अब सभी की दुआ वो क़बूल करे ये ज़रूरी तो नहीं !
140.
"रंजन" का सामान था एक चराग ,एक किताब और उम्मीद ,
जब वो भी लूट लिया असहाब ने तभी तो एक अफसाना बना !

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