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Spirituality

Hindi Couplets Page-15

 




(141)
किस गुरुर से आप आए हैं शीश महल में,
ठहरिये, "रंजन" का दिल नहीं, की टूटना सीखा ही नहीं !!
(142)
ये दाग-ए-दिल ग़म की नज़र है "रंजन",
जुज़ ग़म फिर इनका इलाज़ कौन करे !!
(143)
वो ईजापसन्द ज़ख्म को फूल कहता है तो कहने दो,
"रंजन" को लहूलुहान हुआ दिखा दो उस सख्तजान को !!
(144)
मेरे इल्म ने यूँ तो बहुत से उक़दा-ए-मुश्किल सुलझाया है,
जब बारी आई गन्जीना-ए-फ़ित्रत की तो भाग लिया "रंजन"!!
(145)
फूल क़ागज़ को हो तो भी लोग बाग फूल ही कहते हैं,
"रंजन" सूंघ के भी देख ले, रंगों पे ऐतबार मत कर !!
(146)
उन्हें तो शिकायत इस पर भी है,क्यों गुज़र गया "रंजन",
क्या बुरा मानना किसीके पल पल ऐबजोई का !!
(147)
मेरी दुनिया में आ गए और भर दिया हज़ारों औहामो से,
क्या होगा, कब रुखसत और किसके साथ,नींद नहीं "रंजन"!!
(148)
उनकी कजअदाई में भी बहुत लज्जत है "रंजन",
खुदा खैर करे, आज तलक वफादार बने रहे !!
(149)
ये काकुल-ए-पेचां है कि ज़ंजीर "रंजन",
चुप रहो तो खामोशी, हिलो तो शोर !!
(150)
नासेह तू नसीहत न दे मुहब्बत के बाबत,
हाथ में खाली पैमाना ले,और जा पास "रंजन" के !!

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