Sahitya Sangeet

 

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Couplets-8

 




(71)
तू क्यूँ नहीं मुझे अपना जैसा बना कर रखता,
न वीराने से डर लगता न भीड़ से घबराहट होता !
(72)
दर्द-ए-उल्फत को इस तरहा संजीदगी से संजोया मैंने,
खुदा ने गले लगाया और खुशामदीद मिला कैस से !
(73)
ये किसने इस कदर मजबूर बना दिया है 'रंजन' को,
आफताब है सर पे और वो खोया है अख्तरशुमारी में !
(74)
ये कैसा अख्लाक से सर से पाँव तलक नवाजा मुझको,
जो भी करीब आता है मजबूरन कातिल बन जाता है !
(75)
किस कदर बेख़ौफ़ जी रहा है 'रंजन' अग्यार के साथ,
ऐसा क्या कर दिया उसके असहाब ने उसके साथ !
(76)
किसी ने नाम पूछा तो 'रंजन' का हाल तो देखो,
बेचैन होकर किसी जानने वाले को तलाशने लगा !
(77)
हम भी खड़े है देर से कतार में तवक्को चाहिये ,
सज़ा दे या मुआफ़ कर मेरे सुकून के खातिर !
(78)
कभी जुल्फों से तो जंजीरों में जकड़ा ही रहा ,
क्या मजेदार पैदा हुआ दिल है कि कैदी है !
(79)
तुम्हारे दीदार से अजसरे नौ ज़माना हुआ ,
मुझे ख़तम करते-करते खुद भी तमाम होता !
(80)
आज कुछ इस तरह पिला दे साकी कि होश न रहे,
आज ही उसने मुक़र्रर इम्तिहान को आना था !

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